जल भराव से आम आदमी का जीवन अस्त व्यस्त

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ग्राउंड रिपोर्ट: मोरैया GIDC में नरकीय हालात, जलभराव के बीच ट्रैक्टर पर सवार होकर ड्यूटी जाने को मजबूर मजदूर — प्रशासन की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल
स्थान: मोरैया जीआईडीसी (अहमदाबाद)
रिपोर्टर: [विनोद सिंह कुशवाह/ ब्यूरो चीफ]
अहमदाबाद/मोरैया:
राज्य के प्रमुख औद्योगिक हब माने जाने वाले मोरैया जीआईडीसी (GIDC) क्षेत्र में अव्यवस्था और बदहाली का आलम इस कदर गहरा गया है कि यहाँ काम करने वाले हजारों मजदूरों का जीवन खतरे में पड़ गया है। क्षेत्र में बारिश के पानी के साथ-साथ इंडस्ट्रियल वेस्ट वाटर (रासायनिक पानी) और नालियों का गंदा पानी सड़कों पर उफान मार रहा है। नालियों की सफाई न होने और ड्रेनेज सिस्टम के पूरी तरह ठप पड़ जाने से पूरी जीआईडीसी जलमग्न हो चुकी है।
ट्रैक्टर की ट्रॉली बनी सहारा, स्वास्थ्य पर बड़ा संकट
सड़कों पर कई-कई फीट तक जहरीला और बदबूदार पानी भरा हुआ है। ऐसे में पैदल चलना तो दूर, दोपहिया वाहनों का निकलना भी नामुमकिन हो गया है। कंपनियों में अपनी शिफ्ट पर पहुँचने के लिए मजदूरों को अपनी जेब से पैसे देकर या जोखिम उठाकर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर ठंस-ठंस कर जाना पड़ रहा है।
केमिकल युक्त और ड्रेनेज के इस गंदे पानी में लगातार आने-जाने से मजदूरों में त्वचा रोग (Skin Infection), संक्रमण और गंभीर बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।
बड़ा सवाल: आखिर कहाँ सो रहा है प्रशासन?
इस भयावह स्थिति ने स्थानीय प्रशासन, GIDC अथॉरिटी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) के दावों की हवा निकाल दी है। हर साल मेंटेनेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर करोड़ों रुपये का बजट कागजों पर खर्च दिखाया जाता है, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
प्रशासन पर खड़े होते तीखे सवाल:
प्री-मानसून प्लान की नाकामी: मानसून से पहले ड्रेनेज लाइनों की सफाई और सीवरेज सिस्टम की मरम्मत क्यों नहीं की गई?
कैमिकल वेस्ट की बेरोकटोक निकासी: इंडस्ट्रियल वेस्ट वाटर को खुले में और नालियों में ओवरफ्लो होने देने वाली कंपनियों पर जीपीसीबी (GPCB) कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा?
मजदूरों की सुरक्षा का क्या? जो मजदूर देश की अर्थव्यवस्था और उद्योगों का पहिया चलाते हैं, उनकी जान और स्वास्थ्य को इस तरह जोखिम में क्यों झोंका जा रहा है? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
बजट का हिसाब: जीआईडीसी क्षेत्र से भारी भरकम टैक्स और मेंटेनेंस शुल्क वसूलने के बाद भी जल निकासी के स्थाई इंतजाम क्यों नहीं किए गए?
जनता और श्रमिकों की मांग
स्थानीय श्रमिकों और उद्योगपतियों का कहना है कि यदि जल्द ही पंप लगाकर पानी की निकासी नहीं कराई गई और ड्रेनेज सिस्टम की स्थाई मरम्मत शुरू नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। अब देखना यह होगा कि इस ग्राउंड रिपोर्ट के बाद जिम्मेदार अधिकारी नींद से जागते हैं या फिर मजदूर यूं ही ट्रैक्टरों पर अपनी जान जोखिम में डालकर काम पर जाने को मजबूर रहेंगे।